ॐ
भारत की सनातन संस्कृती का मूल आधार है ॐ, ओम ( अ उ म ) तीन अक्षर से मिलकर बना है ये तीनो वर्ण परमब्रह्म को दर्शाते हैओम का अर्थ
ॐ से ही परब्रह्म की उत्पत्ति और पूरी सृष्टि का निर्माण माना जाता है जिसमे
- "अ " का अर्थ उत्पन्न होना
- "उ" का अर्थ है विकास तथा
- "म" का अर्थ है मौन या ब्रह्मलीन हो जाना
"अउ" की ध्वनी से विशेषकर पेट के अंगो और वक्ष पिंजरों का व्यायाम होता है जबकि "म" के कंपन से हमारे मस्तिस्क, गले , कपाल की नसों आदि का व्यायाम होता है
ओम के आध्यात्मिक, मनोवैज्ञानिक, बोद्धिक और चिकित्सीय लाभ :
- ओम के उच्चारण से गले में कंपन होता है जो थायराइड ग्रंथि पर सकारात्मक प्रभाव डालता है यह कंपन रीड की हड्डी तक जाता है जिससे रीड की हड्डी मजबूत बनती है
- ॐ के उच्चारण से पाचन तंत्र सुचारु रुप से कार्य करता है जिससे पाचनशक्ति मजबूत होती है
- ओम उच्चारण मन को शांति पहुंचाता है अतः हमारी चिंता, तनाव, घबराहट, व्याकुलता स्वत: दूर हो जाती है यह मानसिक और शारीरिक दोनों तरफ से ताजगी देता है आलस्य को दूर करता है वह हमें चुस्त-दुरुस्त व स्वस्थ बनाता है
- ओम का उच्चारण रक्त के प्रवाह को संतुलित बनाए रखता है जिससे ब्लड प्रेशर की समस्या बिलकुल ही कम हो जाती है
- ओम उच्चारण से फेफड़े स्वस्थ व मजबूत बनते हैं व श्वास संबंधी परेशानी कम हो जाती है
- ओम का निरंतर जप हमारी आत्मा को सक्रिय करता है शरीर में नई ऊर्जा का समावेश करता है साथ ही ओम के मंत्र से स्मरण शक्ति मजबूत होती है इसलिए बच्चों को शुरू से ही इसके शिक्षा व अभ्यास कराना चाहिए
ओम उच्चारण करने की विधि
वैसे ओम का उच्चारण आप कहीं भी कभी भी कर सकते हैं रोजाना 5 से 10
मिनट ओम का उच्चारण आपको स्वस्थ उर्जावान बना देता है हो सके तो आप ॐ के उच्चारण के लिए शांत
व आरामदायक स्थिति का चयन करे , आंखें बंद कर कमर को सीधा कर ले अब पूरी तरह से श्वास ले व ओम का उच्चारण करते हुए छोड़िए
ओम का उच्चारण ३ - ३ के भाग में करें तो आच्छा है
पृथम भाग में 75% "अउ" 25% "म"ओम को आप पद्मासन, अर्धपद्मासन, ब्रजासन, आदि स्थिति में बैठकर भी कर सकते हैं
दूसरे भाग में 50% "अउ" 50% "म"
तीसरे भाग में 25% "अउ " और 75% "म"

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