नमस्कार दोस्तों,
गृहवैद्य में आपका स्वागत है
धार्मिक दृष्ठी से देखा जाये तो शंख समुद्र मंथन के समय मिले 14 रत्नों में छठवां रत्न है ,माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु दोनों ही अपने हाथों में इसे धारण किये हुए है |0
शंख में में अ-उ-म् (ओम्) अथवा ‘ओम्’ शब्द की ध्वनि प्रतिध्वनित होती है जहां तक ‘ओम्’ का नाद पहुंचता है वहां तक नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है। पुराणों और शास्त्रों में शंख ध्वनि को कल्याणकारी कहा गया है। इसकी ध्वनि विजय का मार्ग प्रशस्त करती है।
इसी तरह वैज्ञानिक दृष्ठी से देखा जाये तो वैज्ञानिकों
का मानना है कि शंख की आवाज से वातावरण में मौजूद कई तरह के जीवाणुओं-कीटाणुओं हानिकारक
वायरस का नाश हो जाता है शंख बजाने से वातावरण पवित्र होता है. जहां तक इसकी आवाज जाती
है, इसे सुनकर लोगों के मन में सकारात्मक विचार पैदा होते
शंख बजाना स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत लाभदायक है। इससे
पूरक अर्थात साँस सांस लेना , कुम्भक अर्थात सांस रोकना और रेचक अर्थात सांस छोड़ना जैसी प्राणायाम की क्रियाएं एक साथ हो जाती हैं।
शंख मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं
–
दक्षिणावर्ती
मध्यावर्ती
वामावर्ती
दक्षिणावर्ती
मध्यावर्ती
वामावर्ती
दक्षिणावर्ती शंख दाईं तरफ से खुलता है, मध्यावर्ती बीच से जो बहुत ही कम मिलते हैं और वामावर्ती बाईं तरफ से खुलता है।
इन तीन प्रकार के शंखों के अलावा
और भी अनेक प्रकार के शंख पाए जाते हैं जैसे
लक्ष्मी शंख
गरुड़ शंख
मणिपुष्पक शंख
गोमुखी शंख
देव शंख
राक्षस शंख
विष्णु शंख
चक्र शंख
पौंड्र शंख
सुघोष शंख
शनि शंख
राहु एवं केतु शंख आदि
लक्ष्मी शंख
गरुड़ शंख
मणिपुष्पक शंख
गोमुखी शंख
देव शंख
राक्षस शंख
विष्णु शंख
चक्र शंख
पौंड्र शंख
सुघोष शंख
शनि शंख
राहु एवं केतु शंख आदि
शंख का वादन करने के फायदे :
शंख की आवाज लोगों को पूजा-अर्चना के लिए प्रेरित करती साथ ही अच्छे विचारों को जन्म भी देती है
पुराणों में भी जिक्र मिलता है कि अगर श्वास का रोगी नियमित तौर पर शंख बजाए, तो वह बीमारी से मुक्त हो सकता है. प्रतिदिन शंख फूंकने वाले को गले और फेफड़ों के रोग नहीं होते। शंख से मुख के तमाम रोगों का नाश होता है।
शंख बजाने से चेहरे, श्वसन तंत्र, श्रवण तंत्र आदि का व्यायाम होता है साथ ही स्मरण शक्ति बढ़ती है।
हकलेपन या तुतलाने का दोष है तो शंख बजाने से ये दोष दूर होते हैं।
शंख में जल रखने और इसे छिड़कने से वातावरण शुद्ध होता है. रोज सुबह दक्षिणावर्ती शंख में थोड़ा सा गंगा-जल डालकर सारे घर में छिड़कें भूत-प्रेत व दुरात्माओं से मुक्ति मिलती है
शंख में रखे पानी का सेवन करने से हड्डियां मजबूत होती हैं. यह दांतों के लिए भी लाभदायक है. शंख में कैल्शियम, फास्फोरस व गंधक के गुण होने की वजह से यह फायदेमंद है.
घर में शंख रखने व बजने से वास्तु संबंधी समस्या दूर होती है और घर में सकारात्मक उर्जा का आकर्षित होती है
फसलों को पानी देते समय किसी शुभ मुहूर्त में 108 शंखोदक को भी मिला लें, जिससे फसल अच्छी बढ़ेगी, अनाज बढ़ेगा साथ ही अनाज भंडार में कीड़ें-मकोड़ों से बचाने के लियें शंखनाद करना चाहिए।
अतः शंख एक बहुत गुणी यंत्र है, उसे सदा घर में रखें शंख की पूजा नित्य तुलसी से ही करें ताकि घर में क्लेश, दुख-दारिद्रय तथा रोगों का प्रवेश न हो तथा हमारे घर में शांति बनी रहे जन सामान्य में ऐसी भी धारणा है कि, जिस घर में शंख होता है उस घर में सुख-समृद्धि आती है

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